13. मुझे कोई अवसर नहीं मिलता, मैं क्या करूँ?

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Image result for life on earthमेरे एक मित्र ने मुझसे कहा की, "मुझे जीवन-यापन के लिए कोई अवसर नहीं मिलता, मैं क्या करूं?

मैंने उसको घर भेज दिया। मैंने उसको अगली सुबह पांच बजे, पास के एक पार्क में आने को कहा।

अगली सुबह वो छे: बजे आया। सूरज निकल चूका था। मार्च का महीना था तो हलकी सी ठंड थी। वो आते ही माफ़ी मांगने लगा। मैंने पूछा, किस लिए माफ़ी मांग रहे हो। वो बोला, देरी से आया न, इसीलिए।
मैंने कहा, " देखो तुमने सुबह सबसे पहला काम एक घंटे की देरी से शुरू किया है। अब मेरा यहां से जाने का वक़्त हो गया है। मुझे तुमको यही कहना है की, ये ब्रम्हांड तुमको हर रोज एक नया मौका देता है। सूर्य तुम्हे हर सुबह नयी ऊर्जा देता है। वायु हर रोज़ तुम्हें साँसे देती है। जल तुमको हर रोज़ जीवन देता है। धरती तुमको प्रतिदिन आसरा देती है। जीवन जीने का अवसर हर सुबह तुमको मिल रहा है क्या ये काफी नहीं है। काम तो तुम कुछ भी कर सकते हो।"

जैसे तुमको आज मिला है, वैसे ही कल भी मिलेगा। अब देखना ये है की कल तुम आलस में सोये रहोगे या मौके का भरपूर फायदा उठाओगे।


                                                                                                                                           अशोक कुमार



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