किसी ने एक बहुत बड़े विद्वान से पूछा की जीवन क्या है?
विद्वान ने जवाब देते हुए कहा की मानव जीवन एक वृक्ष की भांति है। एक बीज से वृक्ष उगता है। एक सिमित अवधी के बाद वृक्ष बड़ा होता है। जब वृक्ष बड़ा हो जाता है तो एक निश्चित अवधि के बाद फल देना शुरू करता है। फिर एक निश्चित समय तक वो फल देते हुए अंत में सूख कर, किसी न किसी के काम ने आ जाता है। पर इस दुनिया से जाने से पहले वो वृक्ष सैकड़ों बीज इस धरती में लगा जाता है। इसी प्रकार वृक्ष का जीवन चक्र चलता रहता है।
ठीक उसी प्रकार से मानव का जीवन भी है। मानव जीवन एक बीज से पैदा होता है। जिस प्रकार का बीज होता है उसी प्रकार का फल लगता है। वृक्ष की भाति ही मानव अपना परिवार बनाता है। अपने परिवार के लिए कर्म करते हुए मानव एक दिन इस दुनिया से चला जाता है।
जब उसका शरीर मृत हो जाता है तो ये किसी काम नहीं आता है। वृक्ष के विपरीत मानव के शरीर को चिता पर लिटा कर आग के हवाले कर दिया जाता है।
वृक्ष अंत में किसी के काम में आता है और किसी की जरुरत पूरी करके उसका भला करता है पर मानव का शरीर अंत में किसी काम में नहीं आता है। किसी का कोई भला नहीं करता है। इसीलिए प्रत्येक मानव को जीवन जीने के दौरान ही दूसरे भला करने को कहा गया है। क्योकि मृत्यु के बाद वो किसी काम का नहीं है।
अशोक कुमार
आगे पढ़े:- मुझे क्या सोचना चाहिए?
कोई टिप्पणी नहीं