मैंने उसको कहा की, "तुम्हे क्या सोचना चाहिए, इस पर तुम्हारा पूरा हक़ है। तुम जो सोचोगे, वैसा ही तुम्हारा शरीर बर्ताव करेगा। इसमें कोई छिपा हुआ रहस्य नहीं है। ये तो स्वाभाविक है। ये बहुत ही वास्तविक है। ये तो बहुत ही प्राकृतिक है।"
अपनी सोच पर आज तक कोई पूर्णतः काबू नहीं कर पाया है पर कुछ लोगों ने अपने सोचने के तरीके को किसी एक काम में केंद्रित किया है। विद्वान कहतें हैं की अपनी सोच का सिर्फ दो प्रतिशत ही काबू कर लिया जाए और किसी काम पर केंद्रित कर लिया जाए तो उस काम में सफलता तय है।
लेकिन आज के तकनिकी युग में अपनी सोच पर काबू पाना और किसी काम पर केंद्रित करना मानो दुनिया की सबसे ऊंची छोटी पर चढ़ने के बराबर है। जितनी मेहनत दुनिया की सबसे ऊंची छोटी पर चढ़ने में लगती है, याद रखना उतनी ही मेहनत विचारों को काबू करने में लगती है। आप पूर्णतः विचारों को काबू नहीं कर सकते पर जितना आपके बस में सिर्फ उतना ही काबू कर लिया जाए तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है। ये क्रिया धीरे - धीरे होगी। इसमें वक़्त लगेगा। अगर आप कर्मबध है और संकल्पनवान है, तो एक न एक दिन आप अपने विचारों पर कुछ प्रतिशत तक काबू पा सकते हैं।
अशोक कुमार
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