मेरे दोस्त सुनील ने मुझसे एक दिन पूछा की, मैं लोगों से क्या बात करूँ, मुझको कुछ समझ में नहीं आता है? कोई हल है, तो बताओ?
मैंने सुनील को कहा की गाँधी चौक चलो। हम गाँधी चौक गए। वहां पर महात्मा गाँधी जी का एक स्मारक था। स्मारक के पास में खड़े लोग गांधी जी के बारे में बातें कर रहे थे। लोग उनकी महानता की गाथा एक दूसरे को सुना रहे थे।सुनील ने बोला की, यहाँ क्यों लेकर आये हो? मैंने सुनील को कहा की, तुमको गांधी जी मिलवाने लाया हूँ। मैंने सोचा की अगर तुम गांधी जी से मिल गए, तो तुम्हारे सवालों का जवाब मिल जाएगा। मुझे गांधी जी के दर्शन हो जाएंगे। सुनील बोला की, ऐसा कैसे हो सकता है। मुझे तो अब तक कुछ समझ नहीं आ रहा की, तुम क्या कह रहे हो? मैंने उसको कहा की तुम ध्यान से देखों लोग किसके बारे में बात कर रहें हैं।
सुनील: गाँधी जी के बारे में।
मैं: क्यों?
सुनील: क्योकि उन्होने भारत को अंग्रेज़ों से मुक्त कराया था।
मैं: कैसे?
सुनील: अहिंसा की लड़ाई लड़ कर।
मैं: उन्होने कितना महान कार्य किया था।
सुनील: उन्होने देश को आज़ाद कराने के लिए कर्म किया।
मैंने कहा की, आज लोग गाँधी जी के बारे में बातें कर रहें हैं। क्योकि उनके कर्म महान थे। इसीलिए जीवन में पहले कर्म करो। जब तुम कोई कार्य अपने हाथ में ले लोगे तब तुम्हारा कर्म बोलेगा और लोग सुनेगे। तुम्हें किसी से कोई बात करने की आवश्यकता नहीं हैं। एक दिन लोग तुम्हारे बारे में बातें करेंगे।
अशोक कुमार
आगे पढ़े: - जीवन में सबसे ज़्यादा जरुरी क्या है?
कोई टिप्पणी नहीं